Thursday, July 12, 2012


  अब नहीं दिखेंगे दमदार दारा
दशकों तक देश में शक्ति का पर्याय रहे रुस्तम-ए-हिन्द दारा सिंह इस दुनिया से विदा हो गए। गुरुवार को उन्होंने मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। पहले रेस्लर फिर अभिनेता और उसके बाद संसद सदस्य के रूप में लोगों ने उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग रूप देखे। खास बात यह रही कि उनके हर रूप को लोगों ने दिलोजान से पसंद किया। हर आयु वर्ग में उनके चाहनेवाले मौजूद थे। उनके कसरती बदन और दमखम का कोई दीवाना था। आज भी आलम यह है कि जब कोई व्यक्ति अपनी क्षमता से अधिक ताकत का प्रदर्शन करने की कोशिश करता है तो उसे ‘ज्यादा दारा सिंह मत बनो’ या ‘खुद को दारा सिंह समझते हो’ का जुमला जरूर सुनना पड़ जाता है। वैसे तो शुरू से ही उनकी लोकप्रियता जबरदस्त थी, लेकिन रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण ने उन्हें घर-घर में भगवान हनुमान के रूप में स्थापित कर दिया। अपनी जिंदगी में हर मुकाबला जीतने वाले अजेय दारा आखिरकार मौत से हार ही गए। उनके जाने से हुई क्षति की पूर्ति सालों साल नहीं हो सकेगी।

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