Thursday, June 20, 2013

मिल जाएगा साहिल

क्या होगा अब
कब बदलेगा वक्त
कौन करेगा शुरुआत
किससे करें उम्मीद
कहां है सवेरा
छंट सकेगा अंधेरा
महफिल में तनहा
कचोटता है मन
समझाता हूं उसको
नादां है बेचारा
करता है जिद
तोड़ दो तिलिस्म
मुकम्मल करो ख्वाब
उतार दो मुलम्मा
छोड़ दो दुनिया
कर तो हिम्मत
जारी है कशमकश
रात है बाकी
हो गया फैसला
उठ खड़ा हुआ
छोड़ दी सेज
चल दिया अकेला
छूट रही बस्ती
दूर है मंजिल
राह है मुश्किल
जालिम है हाकिम
यकीं है मुझको
दुश्मनों से बचकर
तूफानों से लड़कर
आसां होंगी दुश्वारियां
मदद करेगा मौला
दिखेगी उजली किरण
मिट जाएगी धुंध
दूर होगी निराशा
चलूंगा शब भर
मिल जाएगा साहिल

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